धारा 101, भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत हत्या (Murder) – तत्व , अपवाद , केस लॉ

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 101 के अंतर्गत हत्या का की परिभाषा, तत्व, अपवाद, प्रमुख निर्णय और न्यायिक सेवा व LLB परीक्षा हेतु -


 परिचय

हत्या (Murder) आपराधिक विधि का सबसे गंभीर अपराध है और न्यायिक सेवा, PCS-J तथा LLB सेमेस्टर परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

नई दंड संहिता — Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — में हत्या का प्रावधान धारा 101 में किया गया है, जबकि उससे संबंधित आधारभूत अवधारणा अर्थात आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide) धारा 100 में वर्णित है।

यदि आप हत्या को गहराई से समझना चाहते हैं, तो पहले “आपराधिक मानव वध” और “हत्या” के बीच का सूक्ष्म अंतर समझना आवश्यक है। यही अंतर परीक्षाओं में अच्छे अंक दिलाता है।


संबंधित धाराएँ -

  • धारा 100 – आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide)

  • धारा 101 – हत्या (Murder)

धारा 101 कहती है कि यदि धारा 100 के अंतर्गत किया गया कृत्य विशेष परिस्थितियों में आता है, तो वह हत्या कहलाता है।


 धारा 101 के आवश्यक तत्व (Ingredients of Murder)

किसी कृत्य को हत्या सिद्ध करने हेतु निम्न में से कोई एक स्थिति आवश्यक है:

1️⃣ मृत्यु कारित करने का स्पष्ट आशय

यदि अभियुक्त का प्रत्यक्ष उद्देश्य मृत्यु कारित करना हो।

2️⃣ ऐसी शारीरिक चोट पहुँचाने का आशय जो मृत्यु कारित कर सकती है

यहाँ आशय चोट पहुँचाने का है, और वह चोट मृत्यु का कारण बन सकती है।

3️⃣ ऐसी चोट जो स्वाभाविक रूप से मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त हो

यदि अभियुक्त द्वारा दी गई चोट सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त हो।

4️⃣ अत्यंत खतरनाक कृत्य

यदि अभियुक्त जानता है कि उसका कृत्य अत्यंत खतरनाक है और उससे मृत्यु की अत्यधिक संभावना है।


हत्या के पाँच अपवाद (Five Exceptions)

यदि उपरोक्त तत्व सिद्ध हो जाएँ, तब भी निम्न परिस्थितियों में अपराध हत्या नहीं माना जाएगा बल्कि “आपराधिक मानव वध जो हत्या नहीं है” कहलाएगा:

1️⃣ गंभीर एवं आकस्मिक उकसावा (Grave and Sudden Provocation)

यदि अभियुक्त को अचानक उकसाया गया हो और उसने आवेश में कृत्य किया हो।

📌 प्रमुख निर्णय:
K.M. Nanavati v. State of Maharashtra
इस मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उकसावा वास्तविक, गंभीर और आकस्मिक होना चाहिए।


2️⃣ निजी प्रतिरक्षा की सीमा का अतिक्रमण

यदि अभियुक्त ने आत्मरक्षा में कार्य किया, परंतु आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग कर दिया।


3️⃣ लोक सेवक द्वारा कृत्य

यदि लोक सेवक ने सद्भावना में अधिकार का प्रयोग करते हुए सीमा पार कर दी।


4️⃣ अचानक झगड़ा (Sudden Fight)

यदि बिना पूर्व नियोजन के अचानक झगड़ा हुआ हो।


5️⃣ मृतक की सहमति

यदि 18 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति अपनी मृत्यु के लिए सहमत हो।


 महत्वपूर्ण निर्णय (Case Laws) -

🔹 Virsa Singh v. State of Punjab

यह हत्या संबंधी सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है।
न्यायालय ने कहा:

यदि अभियोजन सिद्ध कर दे कि —

  1. अभियुक्त ने विशेष चोट पहुँचाने का आशय किया,

  2. वही चोट मृत्यु का कारण बनी,

  3. वह चोट सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त थी,

तो अपराध हत्या होगा।

🔹 State of Andhra Pradesh v. Rayavarapu Punnayya

इस निर्णय में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि
“Culpable Homicide is genus and Murder is species.”

अर्थात हर हत्या आपराधिक मानव वध है, परंतु हर आपराधिक मानव वध हत्या नहीं है।


 हत्या एवं आपराधिक मानव वध में अंतर

 आधार                    आपराधिक मानव वध  हत्या
आशयसामान्य                         विशेष एवं घातक
गंभीरताकमअधिक
दंडकममृत्यु दंड या आजीवन कारावास

उदहारण -

- यदि A ने B को चाकू से सीने में वार किया और वह चोट सामान्य रूप से मृत्यु कारित करने योग्य थी, तो यह हत्या होगी।

- यदि A ने अचानक झगड़े में एक बार प्रहार किया और पूर्व नियोजन नहीं था, तो संभवतः यह हत्या न होकर आपराधिक मानव वध होगा।



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